बंदियों को तनाव मुक्त करने को जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर कर रहे अभिनव प्रयोग

जितेन्द्र बच्चन
चित्रकूट। जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर अपने अभिनव प्रयोग के लिए सदैव चर्चा में रहते हैं। इस बार उन्होंने रगौली जेल में प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन कराया। शुक्रवार को उसका समापन हो गया। इससे पहले सागर ने फीता काटकर खेल का शुभारंभ किया। उनका मानना है कि इस तरह के आयोजन से बंदी तनावमुक्त होंगे और उनके बीच भाईचारा बढ़ेगा। इसी कड़ी में क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल मैच में राइटर्स इलेवन टीम ने 15 ओवर में 161 रन बनाए, जबकि सर्किल-11 ने 11 ओवर में 162 रन बनाकर ट्रॉफी जीत ली। अशोक सागर ने खुद विजेता टीम को पुरस्कृत किया और उप विजेता टीम को भी सम्मानित कर उसका उत्साहवर्धन किया।
क्रिकेट टूर्नामेंट के आयोजन से जेल के बंदियों में खुशी का माहौल है। सर्किल 11 टीम के लकी भारत अहिरवार (बंदी) ने बताया कि यहां के बंदी जो तनावग्रस्त रहते हैं, उससे टूर्नामेंट कराने से छूटकारा मिला है। उसने कहा कि जेल अधीक्षक अशोक सागर का यह निर्णय बहुत ही सराहनीय है। खेल के बीच कभी यह अहसास नहीं हुआ कि हम जेल में हैं। ऐसा लगता है जैसे हम सब घर पर हैं और एक पारिवारिक वातावरण में खेल रहे हैं। यहां हर तरह की सुविधा मिल रही है। अधिकारियों की इस पहल से हम बंदीगण बहुत खुश हैं।
जेल अधीक्षक सागर का मानना है कि चित्रकूट की जिला जेल में हुए हत्याकांड से बंदी बहुत तनावग्रस्त थे। दहशत का माहौल था। करीब दो साल से कोरोना संकटकाल के चलते बंदी अपने परिजनों से भी नहीं मिल पा रहे थे। उन्हें इस तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए ही उन्होंने क्रिकेट टूर्नामेंट कराया। सद्भाव बनाने के लिए वालीवाल भी खेलने के लिए सुविधाएं दी गईं। बंदियों को यूनीफार्म उपलब्ध कराई गई। ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से हुई बातचीत में अशोक कुमार सागर ने बताया, “यहां आया तो देखा कि बंदी तनावग्रस्त हैं। विगत वर्ष की घटना से भयभीत हैं। कोरोना के कारण परिजनों से भी नहीं मुलाकात हो पा रही है। ऐसे में 25 दिसंबर को हमने क्रिकेट टूर्नामेंट की शुरुआत की। आज उसका समापन हो गया। इस एक सप्ताह में हमने जो देखा, उसके आधार पर हम कह सकते हैं कि बंदियों के बीच आपसी सद्भाव बढ़ा है। हमारा यह प्रयास सार्थक रहा है। बंदीजन आगे भी इस तरह के आयोजन कराना चाहते हैं। बंदी आपास में जो लड़ाई-झगड़ा करते थे, उससे अलग हटकर कुछ और अच्छा करने का उन्होंने सोचा है। इससे एक अच्छा माहौल बना है और आगे भी हमारा यह प्रयास जारी रहेगा।”
उल्लेखनीय है कि जेल प्रीमियर क्रिकेट टूर्नामेंट में 27 दिसंबर को दो मैच हुए थे। जुविनाइल – 11 ने सर्किल इलेवन को हराकर मैच जीत लिया था। दूसरे मैच में राइटर्स की टीम ने वालॅंटियर इलेवन को हरा दिया था। जिला जेल परिसर में पहले मैच में जुविनाइल इलेवन ने टास जीतकर गेंदबाजी का फैसला लिया। बल्लेबाजी करने उतरी सर्किल 11 की टीम ने निर्धारित 10 ओवरों में 89 रन बनाए जिसमें विजय ने सर्वाधिक 27 रन का योगदान दिया। जुविनाइल इलेवन की ओर से आबिद ने पांच विकेट लिए। जवाब में उतरी जुविनाइल इलेवन के कप्तान किशन ने महत्वपूर्ण 66 रन बनाए और अपनी टीम को पांचवें ओवर में ही जीत दिला दी।
दूसरे मैच में वालंटियर्स इलेवन ने टॉस जीता और राइटर्स को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया। राइटर्स 11 की ओर से कप्तान उमेश ने 50 और पीयूष पांडेय ने 46 रन की पारी खेली। पूरी टीम ने 135 रन बनाए। जवाब में वालंटियर्स की ओर से कमल 23, अभय 18 और रतिभान ने 15 रन बनाए। अंतिम गेंद में जीत के लिए वालंटियर्स को चार रन बनाने थे लेकिन उनके बल्लेबाज दो रन ही बना सके। जिससे राइटर्स इलेवन मैच जीत गया। फाइनल मैच 31 दिसंबर को खेला गया। इस दौरान जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर व जेलर संतोष कुमार ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।
राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हैं अशोक सागर
बुलंदशहर निवासी और जिला जेल चित्रकूट के अधीक्षक अशोक कुमार सागर को स्वतंत्रता दिवस पर उत्कृष्ट सेवा के लिए गोल्ड चिन्ह दिया गया। यह पल चित्रकूट के लिए गौरव का पल था। इससे पहले 14 मई 2021 को चित्रकूट जिला जेल में कुख्यात अपराधियों के बीच गैंगवार में दो की हत्या और फिर पुलिस मुठभेड़ में आरोपी कुख्यात अपराधी की मौत की घटना के बाद जेल अधीक्षक को निलंबित किया गया था। दूसरे ही दिन 15 मई को शासन ने जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर की यहां तैनाती कर दी। तैनाती के बाद से लगातार उन्होंने जेल नियमों के अनुकूल बंदियों के साथ व्यवहार व सुरक्षा को लेकर कई कड़े कदम उठाये। उसी के चलते उन्हें शासन ने प्रशंसा चिन्ह गोल्ड के सम्मान के लिए चयनित किया।
इसके पहले अशोक सागर 26 जनवरी 2019 को सराहनीय सुधारात्मक सेवा पदक राष्ट्रपति पुरस्कार और प्रशंसा चिन्ह सिल्वर प्राप्त कर चुके हैं। वर्ष 1994 में इटावा से नौकरी की शुरुआत करने वाले जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर ने बताया कि उन्होंने शासन के नियमों के अनुरूप जेल में बंदियों के साथ काम किया है। जेल में कई रचनात्मक कार्य भी कराए गए, जो आगे भी जारी रहेंगे।

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