प्रशासन के खोखले वादे से मुफलिसी में जीने को मजबूर पत्रकार विक्रम का परिवार

जितेन्द्र बच्चन
गाजियाबाद। जिले के पत्रकार विक्रम जोशी की एक साल पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के विरोध में तमाम पत्रकारों ने धरना-प्रदर्शन किया। कई पत्रकार संगठनों ने भी आवाज बुलंद की। उसके बाद प्रदेश की योगी सरकार जागी और आर्थिक सहायता देने का ऐलान करने के साथ-साथ डीएम व एसएसपी ने आश्वासन दिया कि विक्रम की पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाएगी और उनके बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दिलाई जाएगी। लेकिन एक साल बाद भी प्रशासन के वादे खोखले साबित हो रहे हैं। ऐसे में जान गंवाने वाले पत्रकार के परिजन मुफसिली में जीने को मजबूर हैं।
उल्लेखनीय है कि सोमवार, 20 जुलाई, 2020 की देर रात विजयनगर थाना क्षेत्र की माता कॉलोनी में पत्रकार विक्रम जोशी को बदमाशों ने उनकी बेटियों के सामने ही कनपटी से तमंचा सटाकर गोली मार दी थी। इसके दो दिन बाद विक्रम की अस्पताल में मौत हो गई थी। पत्रकारों ने इस घटना के विरोध में एकजुटता दिखाते हुए जमकर हंगामा किया था। अंतत: सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना पड़ा। यशोदा अस्पताल पहुंचे उस समय के गाजियाबाद जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय और एसएसपी कलानिधि नैथानी ने पत्रकारों को शांत कराते हुए आश्वासन दिया था कि स्वर्गीय विक्रम जोशी की पत्नी को नौकरी दी जाएगी। बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दिलायी जाएगी। लेकिन एक वर्ष बीतने को हैं और विक्रम जोशी की विधवा को आज तक नौकरी नहीं मिल पायी है। परिवार की हालत दयनीय हो चुकी है।
विक्रम की पत्नी ने बताया कि वह और उनके परिवार वाले जिलाधिकारी के यहां नौकरी के लिए चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। परिवार के भरण-पोषण की दुहाई दी लेकिन गाजियाबाद प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। उनका कहना है विक्रम के बाद परिवार में और कोई कमाने वाला नहीं है। उनकी मां जो अब वृद्ध हो चुकी हैं, उनकी तबियत खराब रहती है। इसके बावजूद वह बहू की नौकरी के लिए डीएम कार्यालय के चक्कर लगाती रहती हैं। मां ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से रुंधे गले से बताया कि बेटे के जाने के बाद घर में खाने तक के लाले पड़े चुके हैं। मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद भी प्रशासन अपने वादे नहीं पूरा कर रहा है। बहू को नौकरी न मिलने से हम सभी मुफलिसी की जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं।
मां सरकार से पूछती हैं, ‘क्या मेरे बेटे विक्रम की यह गलती थी कि उसने पत्रकार होने का धर्म निभाया? उसने गलत लोगों के खिलाफ आवाज बुलन्द की? उसका खामियाजा उसे जान देकर चुकाना पड़ा और अब परिवार चुका रहा है।’

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