कामां विधानसभा सीट : क्या टूटेगा कांग्रेस और भाजपा का तिलिस्म

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
राज्य की 15वीं विधानसभा का कार्यकाल 14 जनवरी 2024 को समाप्त हो जाएगा। पिछला विधनसभा चुनाव दिसंबर 2018 में हुआ था। इस बार सभी 200 सीटों के लिए 25 नवंबर 2023 को मतदान होगा। चुनावी नतीजे 3 दिसंबर को घोषित होंगे। आज सोमवार 6 नवंबर नामांकन की अंतिम तारीख है। इससे पहले रविवार को कांग्रेस ने राज्य चुनाव के लिए अपनी आखिरी और सातवीं सूची जारी करते हुए 21 नाम भी घोषित कर दिए। जबकि भाजपा ने 15 उम्मीदवारों की पांचवी सूची जारी की है।
लेकिन राजस्थान की कामां विधानसभा सीट का चुनाव पहली बार इतनी चर्चा में है। इससे पहले कभी भी राज्य की यह सीट चुनाव के दौरान इतनी चर्चा में नहीं रही। इसका कारण है- युवाओं के मुद्दे पर आवाज बुलंद करने वाले भगवंता सिंह। शायद पहली बार किसी निर्दलीय उम्मीदवार ने यहां पर धुआंधार प्रचार शुरू किया है। भाजपा की ओर से बाहर से लाई गई उम्मीदवार नौक्षम चौधरी के लिए कई बड़े नेता यहां पहुंच रहे हैं तो कांग्रेस की जाहिदा खान खुद राजस्थान की मंत्रियों में शामिल हैं। बसपा के शकील खान भी सक्रिय हैं। इसके बावजूद भगवंता सिंह इन सभी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
कामां में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या इस बार सत्तारूढ़ कांग्रेस का तिलिस्म टूटेग? क्या बीजेपी की पैराशूट उम्मीदवार नौक्षम चौधरी भी यहां से सीट नहीं निकाल पाएंगी? क्या कामां में कोई नया समीकरण बनने जा रहा है? इसका जवाब तो 3 दिसंबर के बाद ही मिलेगा लेकिन इसके पीछे के जो तर्क दिए जा रहे हैं, उसके कई कारण हैं। कामां विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास देखें तो यह सीट कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी के पास रही है। इस बार सवाल है कि क्या कांग्रेस अपनी यह सीट बरकरार रख पाएगी या फिर भाजपा वापसी करेगी अथवा युवकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे भगवंता सिंह जीत हासिल करने में कामयाब होंगे?

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