महावाणी स्मरण के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी आयोजित

रमेश प्रसाद श्रीवास्तव / राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
मुजफ्फरपुर। निराला निकेतन में महावाणी स्मरण के तत्वावधान में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार, कवि शुभ नारायण शुभंकर ने की। अंजनी कुमार पाठक ने आचार्य श्री के गीतों को प्रस्तुत कर गोष्ठी का शुभारंभ किया। फिर उन्होंने अपनी रचना “जिंदगी का ना कोई ठिकाना, आज यहाँ कल कहाँ है जाना…” सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी
मंच संचालन डा. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने किया। अशोक भारती ने “चाँद पर बढ़ रहे हमारे कदम, गीत गाओगे तुम गुनगुनाएंगे हम…” सुनाया। राजवीन्द्र ने उतर रेत में… सुनाया। दीन बन्धु आजाद ने “रेत पे लिखकर मेरा नाम मिटाया ना करो…” सुनाकर शमा बांध दिया। अरुण कुमार तुलसी ने “गुरु बिन भ्रम न मिटे भाई, कोटि जतन करे धर्म कमाई…” सुनाया।
भोजपुरी के गीतकार सत्येन्द्र कुमार सत्यन ने “बाबा बैधनाथ पूरा करिहे मनवा के आस, तोहरा गोदिया में खेलिहें बबुआ के विश्वास…” सुनाकर माहौल में चार चाँद लगा दिया। रामवृक्ष राम चकपुरी ने “राहे मंजर झूल से शवों के देख रोंगटे खड़े हो रहा है…” सुनाया। शुभ नारायण शुभंकर ने “होता जो संसार प्रेममय घृणा जनित उत्पात न होता, छल -छदमों का नाम न होता और कभी संताप न होता…” सुनाया।
उमेश राज ने बज्जिका रचना “आज केतना गिर गेल हए आदमी, अप्पन बनकऽलूट रहल आदमी…” सुनाया। डा. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने जय बज्जिका सुनाया। प्रमोद नारायण मिश्र ने “रिश्ता दिल से बनता है, दिखावा से नहीं बनता…” सुनाया। वरिष्ठ कवयित्री उषा किरण श्रीवास्तव ने “चलो चलें ऐसा कुछ गाएं, मौसम मनभावन हो जाए…” सुनाया। युवा कवयित्री संगीता सागर ने “ऐ मनुष्य तुम हमेशा से दावा करते रहे बेहतर होने का, बेहतर हो तुम हो भी, बुद्धि जो है तुममें…” सुनाई। कार्यक्रम का समापन करते हुए धन्यवाद ज्ञापन समाजसेवी मोहन सिन्हा ने किया।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*