राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
नई दिल्ली। मानहानि केस में सजा मिलने के अगले ही दिन कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई। शुक्रवार को लोकसभा सचिवालय की तरफ से जारी इस बारे में सात पंक्तियों की एक अधिसूचना में कहा गया है कि सूरत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत की तरफ से दोषी करार दिए जाने के बाद केरल के वायनाड से लोकसभा सदस्य राहुल गांधी को उनकी सदस्यता से अयोग्य किया जाता है। यह अयोग्यता उन पर दोष साबित होने के दिन यानी 23 मार्च 2023 से लागू रहेगी और यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 102 (1) (ई) के प्रावधानों और जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा आठ के तहत लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि सूरत की कोर्ट ने मानहानि के एक मामले में राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी। उन्होंने कर्नाटक के कोलार में 13 अप्रैल, 2019 को चुनावी रैली में कहा था, ”नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?” चूंकि पूरे मोदी समाज को लेकर राहुल गांधी ने आपत्तिजनक बयान दिया था, इसलिए उन्हें कोर्ट ने दोषी माना। कोर्ट ने हालांकि सजा को एक महीने के लिए रोक दिया है ताकि वह ऊपर की कोर्ट में अपील कर सकें, लेकिन उनकी दोषसिद्धि को नहीं रोका है। उनको कोर्ट ने जमानत भी दे दी है।
राहुल के इस बयान को लेकर भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था। अपनी इस शिकायत में आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेता ने पूरे मोदी समुदाय को कथित रूप से यह कहकर बदनाम किया कि सभी चोरों का सरनेम मोदी होता है?
कांग्रेस को बड़ा झटका :
अदालत और लोकसभा के निर्णय से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। जनप्रतिनिधि कानून के अनुसार किसी भी सांसद या विधायक को अगर किसी मामले में दो या दो साल से ज्यादा की सजा सुनाई जाती है तो उनकी सदस्यता रद्द हो जाएगी। साथ ही वह छह साल तक चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य हो जाते हैं। ऐसे में अगर राहुल गांधी को ऊपरी अदालत से राहत नहीं मिली तो 2024 का लोकसभा चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे।


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