प्रवीण कुमार/ राष्ट्रीय जनमोर्चा
नई दिल्ली। विश्व जल दिवस के अवसर पर लक्ष्मीबाई कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय में जलधारा जीवनधारा विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राष्ट्रवादी चिंतक के.एन. गोविंदाचार्य, आईआईटी एलुमनाई एसोसिएशन के चेयरमैन रवि शर्मा, पर्यावरणविद डॉ. फैयाज खुदसर, पूर्व सांसद सलखान मुर्मू, यमुना संसद कार्यक्रम के संयोजक रवि शंकर तिवारी व लक्ष्मीबाई कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर प्रत्यूष वत्सला ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
राष्ट्रीय चिंतक, विचारक, जेपी आंदोलन के सूत्रधार और राष्ट्रीय स्वाभिमान के संस्थापक गोविंदाचार्य ने इस अवसर पर कहा कि संकल्पीत मन से ही सिद्धि प्राप्त होती है। आज हमारे प्राकृतिक संसाधन और जल स्रोत अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। हमें आने वाली पीढ़ी को इस तथ्य से अवगत कराना होगा कि जल की उपलब्धता का संयोजन मात्र पीने योग्य पानी से नहीं है अपितु प्रकृति के संतुलित व्यवहार के लिए भी इनका होना अत्यंत आवश्यक है।
अपने जीवन के अनुभव का विश्लेषण करते हुए गोविंदाचार्य ने कहा कि सामाजिक जीवन में सामुदायिक प्रयासों से ही ऐसे प्राकृतिक उपादानों की संरक्षा की जा सकती है, हमें यह समझना होगा सरकार अपना काम करेगी और समाज को अपनी पहल को आगे लाना होगा। अगर हमने अपने कर्तव्यों को राज्य के ऊपर आश्रित कर दिया तो प्रकृति संरक्षण का हमारा संकल्प कभी पूर्ण नहीं होगा, इसलिए हमें सामुदायिक चेतना के भाव से सतत एक कर्मयोगी की तरह प्राकृतिक उपादानों की संरक्षा करनी होगी।
विलुप्त होते जलस्रोत:
आई.आई.टी एलुमनाई एसोसिएशन के चेयरमैन रवि शर्मा ने कहा कि नदियों की उपयोगिता मात्र जल के उपयोग तक निश्चित नहीं है, अपितु प्राकृतिक संतुलन के लिए भी इनका व्यापक महत्व है। पूर्व सांसद मुर्मू ने जनजातीय जीवन और उससे जुड़े हुए प्राकृतिक चुनौतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन के प्रत्येक स्तर पर जल स्रोतों के महत्वपूर्ण आवश्यकता है। जल स्रोतों का विलुप्त होना मानव सभ्यता के लिए एक बड़ी चुनौती है, यह वापस हमें उसी आदिम समाज में ले जाने जैसा है।
और बढ़ेंगी चुनौतियां:
पर्यावरणविद डॉक्टर फैयाज खुद्सर ने कहा कि हमें जल स्रोतों को विकसित करते समय सदैव इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वास्तव में वह भूमि जल स्रोत के लिए उपयोगी है या नहीं, क्योंकि इस वैज्ञानिक तथ्य को बिना समझे अगर हम जल स्रोतों का निर्माण करते हैं तो हम पृथ्वी के भार को और अपनी चुनौतियों को आगे बढ़ाते हैं। आजकल बनने वाले बहुत सारे रिवर फ्रंट इसके उदाहरण हैं।
जीवनधारा महत्वपूर्ण :
प्रो. प्रत्यूष वत्सला ने कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि हम संकल्पित मन के साथ आगे बढ़ रहे हैं और हमारा लक्ष्य है अपनी धरा को सुंदर बनाना। इसीलिए मैं कहती हूँ कि मात्र जलधारा ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि जीवनधारा महत्वपूर्ण है।
मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
कार्यक्रम का संचालन डॉ.सुनील कुमार मिश्र, असिस्टेंट प्रोफेसर समाजशास्त्र विभाग लक्ष्मीबाई कॉलेज द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर ममता शर्मा प्राचार्य अदिति महाविद्यालय, विनय जी संस्थापक स्वास्तिक सेवा फाउंडेशन, प्रोफेसर गीता सिंह चेयरमैन ईपीडीएस, राकेश त्यागी, राजकुमार भाटिया, संस्थापक रोटी बैंक सहित विभिन्न महाविद्यालयों के अध्यापक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


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