अनेक भाषाओं की जननी व संस्कारित भाषा है संस्कृत

अमृतेश कुमार/राष्ट्रीय जनमोर्चा
मोतिहारी।संस्कृत भाषा संस्कारित भाषा है। देवभाषा नाम से विख्यात संस्कृत भाषा प्राकृत, पाली, अपभ्रंश और हिन्दी भाषाओं के साथ अनेक भाषाओं की जननी है। इसमें जहां प्राकृतिक देवताओं से संबद्ध वैदिक साहित्य है, वहीं समाज के नैतिक, धार्मिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक रूप का समुचित चित्रण करने वाला लौकिक साहित्य भी है। उक्त विचार रविवार को मोतिहारी महर्षिनगर स्थित आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान-वेद विद्यालय में श्रावणी उपाकर्म सह संस्कृत दिवस के अवसर पर सोमनाथ संस्कृत युनिवर्सिटी, गुजरात के पूर्व डीन प्रो देवेन्द्र नाथ पांडेय ने व्यक्त किया।
पीयूपी कॉलेज के प्राचार्य डॉ (प्रो) कर्मात्मा पाण्डेय ने इस अवसर पर कहा कि संस्कृत भारत की विविध भाषाओं एवं लोक भाषाओं का रूप लेते हुए भारतीय संस्कृति की प्रधान धारा बनी हुई है। साथ ही पूरे विश्व में व्यापकता, धार्मिकता एंव लौकिकता से परिपूर्ण है। वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पांडेय ने श्रावणी उपाकर्म के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रावणी पर्व वैदिक काल से शरीर, मन और इन्द्रियों की पवित्रता का पुण्य पर्व माना जाता रहा है। इस पर्व पर की जाने वाली सभी क्रियाओं का मूल भाव यही है कि बीते समय में मनुष्य से हुए ज्ञात-अज्ञात बुरे कर्म का प्रायश्चित करना और भविष्य में अच्छे कार्य करने की प्रेरणा देना। इस दिन रक्षाबंधन के अतिरिक्त ऋषियों के स्मरण, पूजन तथा उनके प्रति श्रद्धा-समर्पण का दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस अवसर पर ऋषि पूजन, यज्ञोपवीत प्रतिष्ठा, वेद पूजन, रुद्राभिषेक एवं रक्षाबंधन आदि अनुष्ठान सम्पन्न किए गए। कार्यक्रम में ब्रावो फार्मा के राकेश पाण्डेय, महात्मा गाँधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. विमलेश कुमार सिंह, प्रो. रामनिरंजन पाण्डेय, सुधीर दत्त पाराशर, विनोद पाण्डेय, रुपेश ओझा, जितेन्द्र तिवारी, विकास पांडेय, राजन पाण्डेय, डॉ. अंकेश मिश्र, कुन्दन पाठक, प्रो. अरुण तिवारी, शैलेन्द्र मिश्र बाबा, शैलेन्द्र गिरी, अरुण तिवारी आदि उपस्थित रहे।

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