सुभाष युवा मोर्चा ने भगत सिंह की 118वीं जयंती मनायी

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। जगदीश नगर में सुभाष युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 118वीं जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई। रविवार को मोर्चा के संस्थापक एवं राष्ट्रीय संयोजक सतेन्द्र यादव ने भगत सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उसके बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भगत सिंह के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि भगत सिंह का पूरा परिवार क्रान्तिकारी था। उन्होंने जेल में विश्व की सबसे लंबी भूख हड़ताल की। भगत सिंह की फाँसी को रोकवाने के लिए पूरी दुनिया ने कोशिश की, ब्रिटिश सांसदों तक ने प्रयास किया। लाखों लोगों ने पत्र लिखे, जिसमें तमाम पत्र खून से लिखे गये थे। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस व मौहम्मद अली जिन्ना ने भी पुरजोर कोशिश की, लेकिन अंग्रेजों ने किसी की नहीं मानी। महज 23 साल 5 महीने 25 दिन की उम्र में उन्हें 23 मार्च 1931 की शाम फाँसी दे दी गई।
सुभाष युवा मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य गोपाल सिंह ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि खुद में देशभक्ति के जज्बे को भरने के लिए शहीद भगत सिंह का नाम ही काफी है। उनमें देश के प्रति इतना प्रेम था कि वह हँसते-हँसते फांसी के फंदे पर झूल गये। समाज में फैली शोषण व अमीरी गरीबी की खाई को भगत सिंह के रास्ते पर चलकर ही मिटाया जा सकता है।
कार्यक्रम में मनोज शर्मा “होदिया”, सुनील दत्त, दीपक वर्मा, अनिल सिन्हा, कैप्टन गोपाल सिंह,विनोद अकेला, कमल यादव, रामकुमार शर्मा, राजीव रैना, राजेंद्र गौतम, के पी सिंह यादव, अनिल मिश्रा, भरत आर्य, तेजस्व भारद्वाज, मानव सिंह होदिया, गोपाल, योगेंद्र राय, सुरेश यादव, राजेंद्र सिंह कसाना, राजीव गौतम, राजेंद्र यादव, राजेश यादव, वीरेंद्र प्रताप यादव, अजय श्रीवास्तव, तेजेंद्र कुमार वर्मा, मुनेश कुमार, विकास पांडे, विनय कुमार गुप्ता, संजय श्रीवास्तव, सुभाष चंद्र पांडे, दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव, शुभम मिश्रा, अजय कुमार बिट्टा, हर्षित, दीपक शर्मा, अखिल अहमद, सुभाष गिरी शुक्ला, इंद्रपाल सिंह यादव, अक्षत पुंडीर, लालबाबू झा, मुकेश सिंह पुंडीर, योगेंद्र सिंह, ओमप्रकाश कोरी, धर्मेंद्र सिंह, लक्ष्मण, राम गणेश सिंह, संजय कुमार, काशी सिंह यादव, शिवम, राजपाल शर्मा, देवेन्द्र शर्मा, पवन कुमार, दीपक कुमार रिंकू, अक्षय, रोहित आदि उपस्थित रहे।

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