जितेन्द्र बच्चन
गाजियाबाद। देश के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ कवि गीतकार डॉ. कुँवर बेचैन का आज नोएडा के कैलाश हॉस्पिटल में कोरोना महामारी के चलते निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक छा गया है। डॉ बेचैन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद के उमरी गाँव के रहने वाले थे। ‘बेचैन’ उनका तखल्लुस है। उनका वास्तविक और पूरा नाम डॉ. कुँवर बहादुर सक्सेना था। उनकी शिक्षा चंदौसी में हुई और वे गाजियाबाद के एम.एम.एच. महाविद्यालय में हिंदी विभागाध्यक्ष भी रहे।
हिन्दी के जाने-माने गीतकार डॉ कुंवर बेचैन (78) का गुरुवार को कोरोना के चलते निधन हो गया। कुंवर बेचैन और उनकी पत्नी8 कुछ दिनों से कोरोना से पीड़ित थे। उनका दिल्लीन के अस्प ताल में इलाज चल रहा था। बाद में कवि कुमार विश्वा।स के ट्वीट के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें नोएडा के कैलाश अस्पेताल में भर्ती कराया गया था। आज अपने ट्वीट में कुमार विश्वा स ने लिखा है, ‘कोरोना से चल रहे युद्धक्षेत्र में भीषण दुःखद समाचार मिला है। मेरे कक्षा-गुरु, मेरे शोध आचार्य, मेरे चाचाजी, हिन्दी गीत के राजकुमार, अनगिनत शिष्यों के जीवन में प्रकाश भरने वाले डॉ कुंअर बेचैन ने अभी कुछ मिनट पहले ईश्वर के सुरलोक की ओर प्रस्थान किया। कोरोना ने मेरे मन का एक कोना मार दिया।’
उल्लेखनीय है कि आज के दौर में डॉ. कुँवर बेचैन का नाम सबसे बड़े गीतकारों और शायरों में शुमार किया जाता है। उनके निधन से साहित्य जगत की एक बड़ी क्षति पहुंची है। डॉ. कुँवर बेचैन के व्यवहार से सहज, वाणी से मृदु इस रचानाकार को सुनना-पढ़ना अपने आप में अनोखा अनुभव है। उनकी रचनाएं सकारात्मकता से ओत-प्रोत हैं। ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ परिवार उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अपिर्त करता है।


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