राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। शंभू दयाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय ने 73वां गणतंत्र दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया। प्राचार्य डॉ अखिलेश मिश्रा और पूर्व प्राचार्य डॉ वीएस राय ने ध्वजारोहण किया। राष्ट्रगान के बाद सभी ने झंडे को सलामी दी। इस अवसर पर उच्च शिक्षा निदेशालय इलाहाबाद के शिक्षा निदेशक के संदेश को पढ़ा गया। जिसमें उच्च शिक्षा में आए बदलावों, नई शिक्षा नीति और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाए जाने के लिए जो उपाय सरकार द्वारा किए गए हैं, उनके बारे में विस्तार से बताया गया।
कार्यक्रम का संचालन कर रही डॉ बिंदु कर्णवाल ने गणतंत्र दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 26 जनवरी 1950 को हमारा डोमिनियन स्टेटस समाप्त होकर गणतंत्र स्टेटस प्रारंभ हुआ था, जिसका मतलब था कि हम राजवंश यानी कि पिता से पुत्र को प्राप्त हुई सत्ता का समाप्त कर जनता द्वारा चुने हुए व्यक्ति को हम देश के सर्वोच्च पद पर बैठाते हैं। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर आंकलन होना चाहिए कि जो गणतंत्र के अन्य मानक हैं जैसे कि इसमें जाति प्रथा जिसमें पिता द्वारा किए गए कार्य को करने के लिए पुत्र विवश होता है या फिर मातृसत्ता जैसे कि महिलाओं के परंपरागत कर्म क्षेत्र जो कि घर संभालना है को देखते हुए अभी भी काफी लंबी जनसंख्या के द्वारा यही माना जाता है कि महिलाएं इस कार्य के लिए ही उपयुक्त हैं। अब इन मान्यताओं की भी समाप्ति होनी चाहिए, तभी हम एक वास्तविक गणतांत्रिक देश कहला सकते हैं।
कार्यक्रम में अंग्रेजी विभाग में गेस्ट लेक्चरर के रूप में कार्य कर रहीं कुमारी निशा सैफी ने बहुत सुंदर प्रेरणात्मक गीत गाकर सभी का मन मोह लिया। प्राचार्य डॉ मिश्रा ने कहा कि नई शिक्षा नीति के चैलेंज के लिए सभी को तैयार रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार महाविद्यालय के सभी शिक्षक और कर्मचारी तमाम चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ रहे हैं, उसी तरह हमें अपने सभी कर्तव्यों का संपादन करते हुए नई शिक्षा नीति के अंतर्गत अपने राष्ट्र के निर्माण में सहयोग देकर अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा। कार्यक्रम का समापन मिष्ठान वितरण के साथ हुआ।


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