काशी की गौशालाओं की कब बदलेगी सूरत

रमई पट्टी ग्राम गौशाला में मौजूद हिमांशु राज पांडेय

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
वाराणसी। उत्तर प्रदेश जीव जंतु कल्याण अधिकारी हिमांशु राज पांडेय द्वारा बाबतपुर स्थित रमईपट्टी ग्राम गौशाला का शुक्रवार की रात्रि औचक निरीक्षण किया गया। यहां के गौशाला में तमाम खामियां पाई गईं। गौ माताओं की स्थिति दयनीय है। उनके रहन-सहन, चारा, चिकित्सा आदि की व्यवस्था बहुत खराब है। अन्य गोधन की हालत भी कुछ अच्छी नहीं कही जा सकती। इन समस्याओं के मद्देनजर पांडेय ने गौशाला संचालक अंकिता फाउंडेशन की अध्यक्ष रीता और अन्य स्थानीय लोगों से बातचीत कर गौशाला की स्थिति सुधारने व गौसेवा करने में उनका सहयोग मांगा है।
उल्लेखनीय है कि वाराणसी और उसके आस-पास के इलाके कोरोना महामारी की दूसरी लहर से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई जगह बुनियादी दवाओं की किल्लत महसूस की जा रही है। ऐसे में गौशालाओं की देखभाल निश्चित ही प्रभावित होगी। अनुमान है कि काशी में करीब 150 गौशालाएं हैं। इनकी देखरेख सरकारी और ग्राम पंचायती व्यवस्था के तहत की जाती है लेकिन भ्रष्टाचार के चलते अधिकतर गौशालाओं की हालत चिंताजनक है। कई गौशालाओं की हालत बद से बदतर है। वहां की गौ माताओं के रहन-सहन और खाने की अच्छी व्यवस्था नहीं हो पा रही है, जिससे कई गाय बीमार हो जाती हैं और कई की एक-दो महीने के अंदर मौत हो चुकी है। जो बची हैं, स्वस्थ चारा के अभाव में दूध कम देती हैं या जिस उद्देश्य से इन गौशालाओं को बनाया गया है, उनकी पूर्ति नहीं हो रही है। वह उत्पादन नहीं होता, जिससे समाज को लाभ मिल सकता है। कमोवेश रमईपट्टी ग्राम गौशाला की हालत भी यही है।
रविवार को उत्तर प्रदेश जीव जंतु कल्याण अधिकारी हिमांशु राज पाण्डेय ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ को बताया कि वह अपनी रिपोर्ट सरकार को जल्द ही सौंप देंगे। उनकी पूरी कोशिश है कि काशी की जितनी भी गौशालाएं हैं, उनकी हालत में सुधार आए और यहां की गौशालाओं से जो उत्पादन के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, उसकी पूर्ति हो। पांडेय कहते हैं, ‘इसके लिए जरूरी है कि सामाजिक स्तर पर जनजागरूकता चलाया जाए। ग्राम प्रधान, सरकारी अधिकारी और समाजसेवी संस्थाएं पूरी मेहनत, लगन और ईमानदारी के साथ अपनी भूमिका निभाएं। ये सभी गौशालाओं और गौ माताओं की सेवा करने का संकल्प लें।’ उन्होंने रमईपट्टी ग्राम गौशाला द्वारा गोबर से बने उत्पादों की सराहना की है। साथ ही लोगों से गौ उत्पादों को अधिकाधिक उपयोग करने की अपील की है।
औचक निरीक्षण के दौरान गौ प्रेमी डाँ कृष्ण नाथ पाण्डेय और समाजसेवी अंकित शर्मा उपस्थित थे। गौ प्रेमी डाँ. कृष्ण नाथ पाण्डेय का कहना है, ‘गौ माताओं के सम्वर्धन व गौशालाओं के समुचित विकास के लिए गौ सेवा करना मेरा संकल्प है। इसके लिए हम सभी अपनी टीम के माध्यम से इस सेवा कार्य को करते रहे हैं और आगे भी पूरा प्रयास रहेगा कि लोगों को जागरूक कर गौ सेवा के प्रति उन्हें प्रेरित करें।’ डॉ पांडेय के विचार अच्छे हैं लेकिन यह सवाल अब भी खड़ा है कि काशी की गौशालाओं की सूरत कब बदलेगी?

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