राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गौतमबुद्धनगर। दीपावली नजदीक आते ही बाजार इलेक्ट्रिक लड़ियों से जहां गुलजार होने लगे हैं, वहीं लुप्तप्राय मिट्टी के बने दीए बनाने के कार्य से जुड़े लोग आस लगाए बैठे हैं कि दीपावली पर लोग मिट्टी के दीया खरीदकर उनके हाथ के हुनर से अपने घर और प्रतिष्ठानों को जगमग करेंगे। इससे जहां उनके काम-धंधे को बढ़ावा मिलेगा, वहीं भारतीय संस्कृति और पर्व-त्योहार की असीम खुशियां मिलेंगी। ‘यह दिवाली, दीपों वाली’ नारे के संग सामाजिक संगठन महिला उन्नति संस्था (भारत) के सदस्यों ने आज ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मिट्टी के दीये बांटकर लोगों से दीपावली मनाने का आह्वान किया। संस्था की संरक्षक इंदु गोयल ने इस मौके पर कहा कि हम हर साल दिवाली मनाते हैं। हर घर, हर आंगन, हर बस्ती, हर गांव में सबकुछ रोशनी से जगमगा जाया करता है। आदमी मिट्टी के दीए में स्नेह की बाती और परोपकार का तेल डालकर उसे जलाते हुए भारतीय संस्कृति को गौरव और सम्मान देता है, क्योंकि दीया भले मिट्टी का हो मगर वह हमारे जीने का आदर्श है। हमारे जीवन की दिशा है, संस्कारों की सीख है, संकल्प की प्रेरणा है और लक्ष्य तक पहुंचने का माध्यम है।
मंगलवार, 26 अक्टूबर को दियाली वितरण के दौरान संस्था की संरक्षक इंदु गोयल ने कहा कि लोग पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में आकर अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। दीपावली तो दीपों का त्यौहार है, जिसकी जगह आज इलेक्ट्रिक लड़ियों ने ले ली है। इससे युवा पीढ़ी दीपावली के इस प्रकाशोत्सव पर्व की असली रौनक से अनभिज्ञ होती जा रही है, इसलिए संस्था द्वारा हर वर्ष की भांति मिट्टी के दीये बांटकर लोगों को अपनी संस्कृति की रक्षा और उससे जुड़ने का आह्वान किया जा रहा है।
संस्थापक डा राहुल वर्मा ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ को बताया कि संस्था द्वारा दीपावली पर मिट्टी का दीया जलाने के आह्वान के साथ-साथ लोगों को अपनी संस्कृति और पर्यावरण की सुरक्षा हेतु ‘संस्कृति रक्षा- पर्यावरण सुरक्षा’ का संदेश देने के उद्देश्य से प्रत्येक जनपद में 5000 मिट्टी का दीया बांटे जाएंगे। इस कार्य से दीया बनाने वाले कारोबार से जुड़े लोगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इस अवसर पर मनोज झा, गीता भाटी, विजय तंवर और माधुरी आदि सदस्य उपस्थित रहे।


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