जितेन्द्र बच्चन
मथुरा। वृंदावन में बहुप्रतीक्षित भगवान श्री चित्रगुप्त की विश्व की प्रथम व सबसे ऊंची 51 फुट की प्रतिमा का रविवार को अनावरण हो गया। इस प्रतिमा का अनावरण प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को करना था। विश्व भर के कायस्थों में इसे लेकर हर्षोउल्लास है। श्री चित्रगुप्त पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद पशुपति महीनों से तैयारी में लगे रहे। देश-विदेश में आमंत्रण भेजा। लेकिन प्रतिमा के अनावरण का जब समय आया तो योगी बाबा 27 अक्टूबर को वाराणसी चले गए। वहां हवाई अड्डा मार्ग स्थित हरहुआ के काजीसराय क्षेत्र में 51 फुट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा का अनावरण किया। वृंदावन में न्याय और सत्य के प्रतीक भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा का अनावरण उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री व प्रयागराज के शहर विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह ने किया। इससे कायस्थ समाज में सीएम को लेकर अच्छा संदेश नहीं गया।
कायस्थों का कहना है कि महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद पशुपति के विचार से प्रभु श्री चित्रगुप्त वृंदावन में विराजमान हो गए। उनके और कायस्थ समाज के अथक प्रयास व सहयोग से विश्व की सबसे ऊंची भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा स्थापित हो गई लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अनावरण कार्यक्रम में नहीं आए, यह अच्छी बात नहीं रही। लोग सवाल कर रहे हैं कि पहले से जब सीएम के आने की स्वीकृति थी तो वह वाराणसी क्यों चले गए? आयोजक मंडल तो शनिवार तक यही कहता रहा कि मुख्यमंत्री आएंगे और उन्हीं के हाथों भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा का अनावरण होगा। शनिवार को उत्तर प्रदेश के वन व पर्यावरण मंत्री अरुण सक्सेना पहले से चल रहे इसी कार्यक्रम में शामिल हुए, तब भी यह नहीं बताया गया कि सीएम योगी नहीं आएंगे। ऐसा क्यों?
उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं प्रयागराज के शहर विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह ने स्वयं अपने एक्स एकाउंट पर 27 अक्टूबर तक लिख रखा था कि भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा का अनावरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही करेंगे। फिर ऐसा क्या हुआ कि बाबा का कार्यक्रम वाराणसी जाने का हो गया और वृंदावन में सिद्धार्थ नाथ सिंह उनके प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे? उन्होंने मुख्यमंत्री का संदेश भी दिया। अन्य अतिथियों के साथ-साथ अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनूप कुमार श्रीवास्तव भी इस पावन अवसर पर उपस्थित रहे।
आज सोमवार को ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से श्री चित्रगुप्त पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद पशुपति ने बताया कि प्रभु की कृपा और सभी के सहयोग से आयोजन भव्य व दिव्य रूप से सफल रहा। लेकिन अंदरखाने में चर्चा है कि यहां भी कायस्थों में एकता देखने को नहीं मिली। कायस्थ समाज कई गुटों में बंटा हुआ है। मानने को भगवान चित्रगुप्त को सभी गुट मानते हैं पर राजनीति की बात जब आती है तो एक मंच पर एकसाथ नहीं दिखते। यह कार्यक्रम भी इसी घटिया राजनीति का शायद शिकार हो गया। मुख्यमंत्री को उनके सलाहकारों ने जो भी बताया हो लेकिन हम तो यही कहेंगे कि भगवान चित्रगुप्त सभी को सद्धबुद्धि दें। महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद पशुपति का संकल्प सफल रहा। वृंदावन में स्थापित भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा कायस्थ समाज के गौरव और संस्कृति का प्रतीक है। भव्य व दिव्य आयोजन हुआ। विश्व का कल्याण हो।


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