नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्लू) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक गंगा किनारे बसे पांच राज्यों के 46 जिलों में महज 24 में ही कोरोना संक्रमण के मामले सामने आये हैं। यह देश में कुल मामलों का दो प्रतिशत से भी कम है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के गंगा के किनारे बसे 46 जिलों में से केवल 24 जिलों में ही कोरोना संक्रमण के मामले सामने आये हैं। इनमें से 24 जिलों में अब तक कोरोना के कुल 230 मामले पाये गये हैं, जबकि देश में शनिवार सुबह तक इस महामारी के 13,898 सक्रिय मामले हैं और 480 लोगों की मौत हो चुकी है।
एमओएचएफडब्ल्यू के आंकड़ों के मुताबिक प्रथम चरण (24 मार्च से 14 अप्रैल तक) का लॉकडाउन घोषित होने के बाद दिल्ली, पंजाब आदि से हड़बड़ी में अपने गांवों को लौटे हजारों मजदूरों में से अधिकांश इसी गंगा पट्टी के इलाकों के रहने वाले हैं और उनके लौटने के 18 से 20 दिन होने के बावजूद आमतौर पर उन क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण के मामले नहीं बढ़े हैं।
मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार गंगा के प्रवाह क्षेत्र में आने वाले पहले राज्य उत्तराखंड में सात जिलों में से तीन कोरोना प्रभावित हैं। इनमें अब तक 24 मामले पाये गये हैं। उत्तर प्रदेश में 25 जिलों से गंगा गुजरती है जिनमें 16 जिलों में कोरोना के 175 मामले सामने आये हैं। बिहार में 12 जिले से गंगा गुजरती है, इनमें से पांच जिलों में कोरोना के 31 मामले पाये गये हैं। झारखंड में गंगा साहिबगंज और पश्चिम बंगाल में माल्दा जिले से होकर गुजरती है और दोनों जिलों में अब तक कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक गंगाजल में एक वायरस होता है जिसे निंजा वायरस कहते हैं। निंजा का अर्थ है योद्धा। सौ वर्ष पहले तक ये निंजा वायरस गंगा नदी में बहुतायत में पाये जाते थे। वैज्ञानिक इन्हें बैक्टेरियोफाज कहते हैं और भारत की जनता इसे गंगा के गंगत्व के नाम से जानती है। गंगत्व यानी गंगा का वह तत्व जिससे गंगा जल कभी खराब नहीं होता।


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