राम द्रोहिए के लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं: CM योगी आदित्यनाथ

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
लखनऊ। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने दो-टूक कहा कि जिनके मन में भारत के प्रति आस्था, निष्ठा नहीं है और जो संस्कारों का सम्मान नहीं कर सकते, ऐसे लोगों के लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं हो सकती। प्रभु श्रीराम से द्रोह करने वालों को धरती पर जगह नहीं मिली।
लव व लैंड जिहाद के प्रति आगाह करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके विरुद्ध समाज को एकजुटता के साथ खड़ा होना होगा। तोड़ने वाली ताकतें जाति, भाषा, क्षेत्र के नाम पर विभाजित करने की चेष्टा करेंगी, लेकिन भारत की संत शक्ति समाज को एकजुट कर देश को आगे ले जाना चाहती हैं। व्यासपीठ द्वारा जिस मर्म को समझाने का प्रयास किया गया, हमें उसे आत्मसात करना होगा।
मुख्यमंत्री मंगलवार, 9 जून को राजधानी लखनऊ में सीतापुर रोड स्थित सेवा अस्पताल परिसर में 9 दिवसीय रामकथा के समापन अवसर पर रामभक्तों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने रामकथा का श्रवण भी किया। कथा का वाचन तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा किया गया। सीएम योगी ने श्रद्धालुओं से कहा कि जो भी प्रभु के सान्निध्य में आया, वह दैवीय आपदा से मुक्त रहता है। उन्होंने कामना की कि हर श्रद्धालु का जीवन सुख व समृद्ध के साथ बढ़ता रहे।
सीएम ने कहा कि 491 वर्ष तक श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन चलता रहा। 2019 में सर्वोच्च न्यायालय की फुल बेंच के न्यायमूर्तियों ने अपने फैसले में कहा कि जहां रामलला विराजमान हैं, वहीं रामजन्मभूमि है। इसे लेकर साक्ष्य-प्रमाण और विद्वानों के वक्तव्य भी दिए गए थे। सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायमूर्ति ने स्वामी रामभद्राचार्य जी के बारे में कहा कि जब मैंने उनके वक्तव्य को सुना तो लगा कि सनातन धर्मावलंबियों के साथ सैकड़ों वर्षों से अन्याय हो रहा था।
लैंड जिहाद से जुड़े थे खऱ-दूषण
सीएम ने कहा कि हर कालखंड में नकारात्मक ताकतें आएंगी, लेकिन इसके मुकाबले के लिए समाज की सज्जन शक्ति को मिलकर तैयार रहना होगा। मारीच, खर-दूषण, सुबाहु भी लैंड जिहाद से जुड़े थे। जबरन जमीन पर कब्जा कर रहे थे। हमें लैंड जिहाद से जुड़े लोगों से मुकाबले को भी तैयार रहना होगा। खाली जमीन पर तंबू गाड़ने की प्रथा बंद होनी चाहिए।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने समाज को दी दिशा
सीएम योगी ने कहा कि यहां यह जानने-सुनने का अवसर प्राप्त हुआ कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रभु की गाथा को हम सब कैसे अंगीकार कर सकते हैं। जगद्गुरु बनने के पहले रामभद्राचार्य जी ने लंबे समय तक अखंड साधना की। उन्होंने समाज को दिशा दी है। अपनी मेहनत, दृढ़ संकल्प के साथ जीवन की बाधाओं व समाज की बेड़ियों को तोड़ा है। उन्होंने देश के लिए आदर्श प्रस्तुत किया है कि आपके सत्संकल्प के सामने कोई बाधा नहीं टिक सकती। सीएम ने कहा कि छह माह के लिए उनका फिर से एकांतिक साधना के लिए प्रस्थान हो रहा है। प्रार्थना है कि यह साधना पर्व राष्ट्र मंगल के लिए कल्याणकारी हो।

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