राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
धनबाद। पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड में बेंगलुरु एसआईटी ने गुरुवार को धनबाद के कतरास से आरोपित ऋषिकेश देवरिकर उर्फ राजेश को गिरफ्तार कर लिया। ऋषिकेश कुछ दिनों से यहां पहचान छिपाकर रह रहा था। वह कतरास में पेट्रोल पंप पर केयरटेकर का काम कर रहा था। ऋषिकेश को पुलिस गौरी लंकेश की हत्या के अलावा भी चार मामले में तलाश रही थी।
बेंगलुरु पश्चिम के डीसीपी एमएन अनुचेत ने बताया कि ऋषिकेश का नाम गौरी लंकेश हत्याकांड में अनुसंधान के दौरान आया था। उन्होंने कहा कि गौरी लंकेश की हत्या में कुल 18 लोगों के नाम अभी तक सामने आए हैं। इनमें अमोल काले की भूमिका प्रमुख थी। ऋषिकेश भी हत्या की साजिश में शामिल रहा है। बेंगलुरु पुलिस शुक्रवार को उसे ट्रांजिट रिमांड पर अपने साथ लेकर जाएगी। बताया गया है कि कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम (कोका एक्ट) के तहत भी कुछ लोगों पर शिकंजा कसा जा रहा है। बेंगलुरु पुलिस ने ऋषिकेश की गिरफ्तारी मोबाइल टावर लोकेशन के आधार पर की। छापेमारी के दौरान पुलिस ने उसके कमरे की तलाशी ली। कमरे से सनातन धर्म की कुछ पुस्तकों समेत कई सामान जब्त किए गए है।
टीम का नेतृत्व कर रहे इंस्पेक्टर पुनीत ने कहा के ऋषिकेश को पुलिस पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के अलावा भी चार मामले में तलाश रही थी। उसके खिलाफ सामाजिक संस्था से जुड़े चार लोगों की हत्या का मामला दर्ज है। हत्या में शामिल एक दर्जन से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पिछले डेढ़ साल से इसकी खोज हो रही थी। इस बीच वह कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए झारखंड चला आया था। ऋषिकेश महाराष्ट्र के औरंगाबाद का निवासी बताया जाता है। उसने अलग-अलग नाम से लोगों के बीच अपनी पहचान बनाई थी, ताकि पकड़ में नहीं आ सके।
कतरास के पंप मालिक सह सनातन संस्था के प्रमुख प्रदीप खेमका ने बताया कि बेरोजगारी और अपने को साधक बताकर वह नौकरी मांगने आया था। छह-सात माह से उनके यहां वह नौकरी कर रहा था। पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या का आरोपित ऋषिकेश देवडीकर को गुरुवार को धनबाद से गिरफ्तार किया गया। बेंगलुरु की एसआइटी ने धनबाद के कतरास में छापेमारी कर उसकी गिरफ्तार की। पुलिस ने उसके कमरे से सनातन धर्म की कई पुस्तक भी बरामद किया है। उल्लेखनीय है कि गौरी लंकेश की हत्या 5 सितंबर 2017 को बेंगलुरु में कर दी गई थी। मगलुरु की रहने वाली पत्रकार गौरी लंकेश एक सोशल एक्टिविस्ट भी थी। वह कन्नड़ साप्ताहिक अखबार ‘लंकेश पत्रिके’ की संपादक थी जिसे उनके पिता पी. लंकेश ने शुरू किया था। 1962 में जन्मी गौरी लंकेश ने अपने करियर की शुरुआत बेंगलुरु में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से की थी। कुछ समय के लिए वह दिल्ली आईं और फिर वापस बेंगलुरु लौट गईं, जहां ‘संडे’ मैग्जीन और ‘इनाडु’ के तेलुगू चैनल के साथ काम किया। इसके बाद गौरी ने अपना साप्ताहिक अखबार ‘गौरी लंकेश पत्रिके’ का प्रकाशन शुरू किया। लंकेश पर शुरू से ही नक्सल समर्थक एवं हिंदुत्व विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं। उनकी हत्या 5 सितंबर 2017 को बेंगलुरु में कर दी गई थी।


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