महापरिनिर्वाण दिवस: महिला उन्नति संस्था के संस्थापक ने बाबा साहेब आंबेडकर को किया याद

राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का आज महापरिनिर्वाण दिवस है। भारत के संविधान के प्रमुख वास्तुकार एवं दलित आदर्श आंबेडकर का 6 दिसम्बर, 1956 को निधन हुआ था। इस मौके पर महिला उन्नति संस्था (भारत) के संस्थापक डॉ राहुल वर्मा ने उन्हें याद किया है। डॉ वर्मा ने संविधान निर्माता बीआर आंबेडकर को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, ‘‘महापरिनिर्वाण दिवस पर महान डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर को याद करता हूं। उनके विचार और आदर्श लाखों लोगों को शक्ति प्रदान करते हैं। हमारे राष्ट्र के लिए उन्होंने जो सपने देखे थे, हम सभी उन्हें पूरा करने के लिए कटिबद्ध हैं।’’
रविवार को भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न डा भीमराव आंबेडकर के 64वें महापरिनिर्वाण दिवस पर सामाजिक संगठन महिला उन्नति संस्था (भारत) के सदस्यों ने दादरी के जारचा स्थित कार्यालय पर “आधुनिक भारत के निर्माता” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। संस्था के कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। गोष्ठी में बोलते हुए संस्था के संस्थापक डा राहुल वर्मा ने आधुनिक भारत के निर्माण में बाबा साहेब के अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा साहेब समाज के दबे कुचले और शोषित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोडऩे के लिये जीवन पर्यन्त लड़ते रहे। वो देश में समानता के पुरजोर समर्थक थे। उनके द्वारा निर्मित भारतीय संविधान देश की आत्मा है जिस पर चलकर आज हमारा देश एक सबल राष्ट्र के रूप में विश्व स्तर पर अपना परचम लहरा रहा है।
संस्था की प्रदेश अध्यक्ष सरिता वर्मा ने महिला सशक्तीकरण हेतु किये गये उनके कार्यों को याद करते हुए कहा कि हिन्दू कोड बिल के द्वारा बाबा साहेब ने महिलाओं को पुरुष के बराबर अधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज माहिलाओं को प्राप्त अधिकार बाबा साहेब की देन है।
संगोष्ठी के अंत में जारचा निवासी आर के सागर के नेतृत्व में आम लोगों ने बेटियों की उच्च शिक्षा को लेकर कस्बे में बालिका डिग्री कालेज के लिये महिला उन्नति संस्था को एक ज्ञापन दिया है। साथ ही बाबा साहब की याद में पौधारोपण किया गया। गोष्ठी में संस्था के संरक्षक मास्टर वीरेंद्रपाल राणा, अनिल भाटी, नरेश वर्मा, विजय तंवर, गीता भाटी, हरेन्द्र आनन्द, डा रवि कुमार और गंगा प्रधान आदि उपस्थित रहे और इन सभी ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये।

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