राकेश टिकैत का फसल जलाने का बयान दुर्भाग्यपूर्ण: रामकुमार वालिया

पत्रकारों को संबोधित करते हुए एफएएफ के सलाहकार रामकुमार वालिया

जितेन्द्र बच्चन
– उर्वरक सलाहकार फोरम के सदस्य वालिया ने कहा- अगर किसान नेता चाहें तो वे प्रधानमंत्री से उनकी बातचीत करने के लिए मध्यस्था कर सकते हैं
गाजियाबाद। भारत सरकार द्वारा गठित उर्वरक सलाहकार फोरम (एफएएफ) के सदस्य/सलाहकार रामकुमार वालिया के आज यहां दिल्ली से पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। वालिया उत्तराखण्ड के पूर्व राज्य मंत्री और इंडियन किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने पत्रकार वार्ता में सबसे पहले खुद को कमेटी में नामित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा के प्रति आभार जताया। उसके बाद वालिया ने भाकियू के नेता राकेश टिकैत द्वारा दिए गए बयान ‘किसान अपनी फ़सल जला देंगे’ को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
उल्लेखनीय है कि उर्वरक सलाहकार फोरम (एफएएफ) देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस फोरम में कुल नौ लोग हैं। इसके अध्यक्ष कबीना मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा, उपाध्यक्ष राज्य मंत्री मनसुख भाई मंडाविया और सदस्य/सचिव केंद्रीय सचिव आरके चतुर्वेदी हैं। इनके अलावा रामकुमार वालिया सहित छह अन्य सदस्य और सलाहकार बनाए गए हैं। यह फोरम भारत के उर्वरक एवँ रसायन मंत्रालय के महत्वपूर्ण कार्यों, नई-नई जन उपयोगी योजनाओं को बनान तथा बेहतर क्रियान्वन हेतु मंत्रालय को सलाह देने का काम करेगा।
शनिवार, 20 फरवरी को आयोजित प्रेस वार्ता में रामकुमार वालिया ने बताया कि फोरम को लेकर उनकी पहली बैठक कमेटी अध्यक्ष सदानंद गौड़ा के साथ मंगलवार, 23 फरवरी को होगी। उसके बाद वे अपना कार्य शुरू करेंगे। उनका प्रयास होगा कि देश के किसानों को और अधिक सस्ती दर पर खाद के कट्टे तथा किट नाशक दवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
वालिया ने किसान आंदोलन को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि जब केंद्र सरकार किसानों से वार्ता करने को तैयार है और इन कानूनों को रोकने को तैयार है तो फिर किसान नेता किसलिए आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राकेश टिकैत द्वारा यह बयान देना कि किसान अपनी फ़सल जला देंगे, बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बयान है। टिकैत को अपना बयान वापस लेना चाहिए। साथ ही इसके लिए उन्हें देश के किसानों से माफी मांगनी चाहिए।
वालिया ने किसान नेताओं को किसी के भी बहकावे में नहीं आने के लिए अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसान नेता चाहें तो वे उनकी प्रधानमंत्री से वार्ता कराने के लिए आगे आ सकते हैं। किसानों के आंदोलन से अब जनजीवन अस्त-व्यस्त होने लगा है। अब तक देश का 5 हजार करोड़ से भी अधिक का नुकसान हो चुका है। विकास बाधित हो रहा है, इसलिए किसानों को देशहित में तुरंत अपना आंदोलन समाप्त करना चाहिए।
पीआरओ तुषारकांत कुंवर ने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ को बताया कि प्रेस वार्ता का आयोजन इंडियन किसान यूनियन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मीडिया प्रभारी नरेन्द्र सिंह चौहान द्वारा किया गया। इस अवसर पर भाजपा के मंडल अध्यक्ष राकेश गुप्ता, इंडियन किसान यूनियन के नेता नरेन्द्र चौहान, सौरभ, बिहार अध्यक्ष अजय गुप्ता और कई अन्य किसान नेता उपस्तिथ रहे।

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