राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नोएडा। गेझा सेक्टर 93 में स्थित न्यू नोएडा पब्लिक स्कूल में शनिवार को बड़े हर्षोल्लास के साथ वसंत पंचमी का उत्सव मनाया गया। इस दौरान विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की गई। इस मौके पर प्रधानाचार्य श्रीमती श्वेता त्यागी वसंत पंचमी का महत्व बताते हुए कहा कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक वर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर वसंत पंचमी मनाई जाती है। इस रोज वाणी, ज्ञान, कला और शिक्षा की देवी मां सरस्वती की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है।
श्रीमती त्यागी ने कहा कि वसंत पंचमी के पर्व को श्रीपंचमी और वागेश्वरी जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मां सरस्वती प्रकट हुई थीं। इसी कारण से वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की विशेष रूप से पूजा-आराधना होती है। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि इस दिन विद्या आरंभ करने से ज्ञान में वृद्धि होती है और वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। इस रोज कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त के संपन्न किया जा सकता है। वसंत पंचमी के दिन न सिर्फ गंगा स्नान, दान और देवी सरस्वती की पूजा होती है बल्कि कई अन्य कारणों से भी इसका विशेष महत्व है।
शनिवार, 5 फरवरी को उन्होंने बताया कि वसंत ऋतु को मधुमास के नाम से भी जाना जाता है। इसके आरम्भ होने के साथ सर्दी का समापन शुरू हो जाता है। इस मौसम में सभी वृक्ष पुरानी पत्तियों को त्यागकर नई पत्तियों व पुष्पों को जन्म देते हैं। वसंत पंचमी के दिन ही हिन्दी साहित्य की अमर विभूति महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म हुआ था। इसके अलावा यह पर्व महान योद्धा पृथ्वीराज चौहान की भी याद दिलाता है। उन्होंने विदेशी हमलावर मोहम्मद ग़ोरी को 16 बार पराजित किया और उदारता दिखाते हुए हर बार जीवित छोड़ दिया।
श्रीमती त्यागी ने कहा कि वसंत पंचमी के दिन कोई भी नया काम प्रारम्भ करना भी शुभ माना जाता है। जिन व्यक्तियों को गृह प्रवेश के लिए कोई मुहूर्त न मिल रहा हो वह इस दिन गृह प्रवेश कर सकते हैं या फिर कोई व्यक्ति अपने नए व्यवसाय को आरम्भ करने के लिए शुभ मुहूर्त को तलाश रहा हो तो वह वसंत पंचमी के दिन अपना नया व्यवसाय आरम्भ कर सकता है।
विद्यालय में पूजा के बाद बच्चों को प्रसाद दिया गया। इस मौके पर शिक्षिका मंजू मेहता, अनीता शर्मा, वंदना झा, सुषमा झा, रंजना तिवारी, कोमल, निशा आरती, नेहा आदि शिक्षक गण मौजूद रहे।


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