राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक स्वर्गीय डॉ गिरीश बिहारी की आज जयंती मनाई गई। इस मौके पर पुलिस विभाग में रहते हुए उनके कार्यों का संस्मरण किया गया। यूपी के पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ विक्रम सिंह ने डॉ गिरीश बिहारी को नमन करते हुए कहा कि दस्यु उन्मूलन अभियान में डॉ गिरीश बिहारी का बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान रहा।
शुक्रवार, 5 मार्च को स्वर्गीय डॉ गिरीश बिहारी की पुत्रवधू डॉ सीमा वर्मा की अध्यक्षता में उनके निवास स्थान उत्तरायण, शांति निकेतन, न्यू हैदराबाद, लखनऊ में कार्यक्रम आयोजित किया गया। डॉ सीमा वर्मा ने उनके चित्र पर माल्यार्पण करते हुए कहा कि डॉ गिरीश बिहारी न केवल कर्मठ, निर्भीक और ईमानदार पुलिस अधिकारी के रूप में जाने जाते थे बल्कि उनके द्वारा मानवीय विचारधारा के साथ 2009 में स्थापित शैक्षिक संस्थान ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेशल एजुकेशन’ भी बाखूबी अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। यह संस्थान अपंग तथा आर्थिक रूप से कमजोर एवं होनहार विद्यार्थियों के लिए संचालित है। उन्होंने यह भी बताया कि डॉ गिरीश बिहारी के दोनों पौत्रों के लिए उनके बाबा का जीवन अत्यंत प्रेरणादायक है।
पूर्व महानिदेशक डॉ विक्रम सिंह ने बीते दिनों को याद करते हुए कहा कि डॉ गिरीश बिहारी ने भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी पदों पर रहते हुए अनेक सफल प्रयोग किए।कम्युनिटी पुलिसिंग के ऊपर विश्व के प्रचलित व्यवस्था का अध्ययन किया और बरेली, आगरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर रहते हुए अनेक सार्थक अभिनव प्रयोग किए। उन्होंने माफिया, अपराधियों तथा अनेक असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने का कार्य बहुत ही निर्भीकता से करके पुलिसकर्मियों के समक्ष एक मानक स्थापित किया। उनका दस्यु उन्मूलन अभियान में बड़ा योगदान रहा।
उल्लेखनीय है कि फतेहगढ़ के एक साधारण परिवार में जन्मे बहुमुखी प्रतिभा से युक्त डॉ गिरीश बिहारी पुलिस महानिदेशक के पद तक पहुंचे और अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाकर हर साधारण नागरिक के लिए अनुकरणीय उदाहरण पेश किया। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेशल एजुकेशन संस्था के प्रांगण में डॉ गिरीश बिहारी की मूर्ति स्थापित है और उनके लिए मशहूर शायर मजरूह सुल्तानपुरी द्वारा लिखी गई ये पंक्तियां एकदम सही प्रतीत होती हैं, “मैं अकेला ही चला था जानिब ए मंजिल मगर
लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।”
डॉ गिरीश बिहारी की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि देने वालों में डॉ सीमा वर्मा, सिद्धांत वर्मा, अनंत वर्मा, रूपाली सक्सेना, मनीष सक्सेना, निशिथ कुमार, पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ विक्रम सिंह, आईआईएसई की कर्मचारी प्रतिमा श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।


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