राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
नई दिल्ली। समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र बच्चन ने कहा है कि भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। मोदी सरकार अगर पूरी ईमानदारी के साथ करप्शन खत्म करना चाहती है तो पत्रकारों को और अधिकार देने होंगे। किसी भी प्रकार के डर-भय और दबाव की राजनीति से उन्हें मुक्त रखना होगा।
श्री बच्चन गुरुवार, 23 फरवरी, 23 को दिल्ली में एसकेएफआई के भ्रष्टाचार विरोधी प्रकोष्ठ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, लेखकों, लोक गायकों, कवियों और पत्रकारों पर किसी तरह की बंदिश लगाने का मतलब है कि सरकार अभिव्यक्ति की आजादी पर भी पहरा बिठाना चाहती है। लोकतंत्र के लिए यह अच्छी बात नहीं है। उन्होंने इस मामले में पत्रकारों को भी आगाह करते हुए कहा, “केन्द्र हो या किसी प्रदेश की सरकार, हर विभाग के लिए बजट बनता है लेकिन पत्रकार हितों की रक्षा के लिए किसी को चिंता नहीं है। हम सरकार को आईना दिखाते हैं, लोकतंत्र की रक्षा और सशक्त समाज के लिए जान की बाजी लगा देते हैं, लेकिन हमें क्या मिलता है? फर्जी मुकदमों की फेहरिस्त और लाठी-गोली? यह दोगली नीति बंद होनी चाहिए। सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह पत्रकार हितों का भी पूरा ख्याल रखे।”
जितेन्द्र बच्चन ने बढ़ती महंगाई और रिश्वतखोरी पर चिंता व्यक्त करते कहा कि आज शायद ही ऐसा कोई महकमा बचा है जहां के ज्यादातर अधिकारी और कर्मचारी भ्रष्टाचार में न डूबे हों। शहर-नगर हर जगह पैसों का खेल चलता है। मोदी सरकार के आने के बाद तमाम कार्य ऑन लाइन हो गए, इसके बावजूद रिश्वतखोरी बंद नहीं हुई है। पुलिस हो या प्रशासन, बिना लेन-देन के आज भी कहीं काम नहीं होता। जरूरत है इन्हें बेनकाब करने की। और यह कार्य पत्रकारों से बेहतर और कोई नहीं कर सकता। लेकिन इसके लिए पत्रकारों को और अधिकार देने होंगे। मान्यता प्राप्त और गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों के बीच का भेदभाव मिटाना होगा। मीडिया को मुट्ठी में कर लेना एक लोकतांत्रिक सरकार के लिए अच्छी बात नहीं है।


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