राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। राजकीय जिला एमएमजी चिकित्सालय के कई भवन अनुपयोगी एवं असुरक्षित हो चुके हैं। इस सम्बंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने 27 मार्च 2018 को समिति की निरीक्षण आख्या लखनऊ भेजी थी। जिसमें लिखा गया है कि चिन्हित भवनों का ध्वस्तीकरण कराकर इनका नवनिर्माण कराया जाए अथवा सभी भवनों का ध्वस्तीकरण कर 500 बैड का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बनाया जाए। इसके बावजूद आज तक शासन-प्रसाशन खामोश बैँठा है। ऐसे में कभी भी कोई हादसा हो सकता है, जिसकी जानकारी देते हुए मानवाधिकार कार्यकर्ता एडवोकेट विष्णु कुमार गुप्ता ने सांसद अनिल अग्रवाल को आज एक ज्ञापन सौंपा है। उनकी मांग है कि इस संबंध में तत्काल कार्यवाही की जाए।
शनिवार को ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ को भेजे ज्ञापन की प्रति में गुप्ता ने बताया है कि प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए उनके द्वारा मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में उठाया गया था। उसके बाद जिलाधिकारी गाजियाबाद को समुचित कार्यवाही करने के आदेश भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद इस मामले में लापरवाही बरती जा रही है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता एडवोकेट विष्णु कुमार गुप्ता ने बताया कि एमएमजी अस्पताल में रोजाना करीब 3000 व्यक्ति आते हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सालय का मामला कितना संवेदनशील है, यह उनके द्वारा आरटीआई से प्राप्त रिपोर्ट दिनांक 27-3-2018 से स्पष्ट है। यहां पर कभी भी कोई हादसा होने की पूरी संभावना है, जिससे जानमाल की हानि हो सकती है। गुप्ता ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी 10 मई 22 को जनहितार्थ प्रार्थना पत्र प्रेषित किया है। साथ ही 27 मार्च 2018 की समिति की रिपोर्ट के अनुसार कार्यवाही करने और गाजियाबाद के लिए एक मेडिकल कालेज की स्थापना करने की मांग की है। इसके अलावा चिकित्सालय की अनुपयुक्तता के दृष्टिगत शीघ्रातिशीघ्र शासन से कार्यवाही कराने के लिए वह मुहिम भी चला रहे हैं।


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