राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
गाजियाबाद। भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए कार्य कर रही एक अच्छी संस्था ‘एंटी करप्शन फेडरेशन ऑफ इंडिया’ का भविष्य खतरे में पड़ गया है। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक मुकुल शर्मा ने अपने सभी पदों से त्यागपत्र दे दिया है और खुद को संस्था के सभी ह्वाटसएप ग्रुपों से अलग कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह संस्था से कार्यमुक्त हो रहे हैं। साथ ही संस्था का राष्ट्रीय कार्यालय संपर्क सूत्र व पता भी निरस्त कर रहे हैं।
मुकुल शर्मा के निर्णय से ‘एंटी करप्शन फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के करीब-करीब सभी पदाधिकारी आश्चर्यचकित और आहत हैं। कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनसे संपर्क कर इस फैसले को वापस लेने का भी दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन शर्मा का कहना है कि वह अपने निर्णय पर अटल हैं। उन्होंने ‘राष्ट्रीय जनमोर्चा’ से बताया कि ‘एंटी करप्शन फेडरेशन ऑफ इंडिया’ की शुरुआत उनके और राष्ट्रीय महासचिव जीतेन्द्र कुमार की साझेदारी में हुई थी। दोनों ही सदस्य संस्था के संस्थापकों में रहे हैं। लेकिन कुछ असंतोषजनक क्रियाक्लापों के चलते अब वह इस संस्था को समय नहीं दे सकते और संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से वह खुद को कार्यमुक्त कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक ‘एंटी करप्शन फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के संविधान के अनुसार मुकुल शर्मा और जीतेन्द्र कुमार में से अगर एक भी सदस्य संस्था से हटता है तो पूरी संस्था भंग मानी जाएगी। यही कारण है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकुल शर्मा ने 13 जुलाई0 2021 को अपना इस्तीफा देते हुए यह भी लिखा है कि यदि उनके त्यागपत्र के बाद भी संस्था चलाई जाती है तो उनकी इसमें किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं रहेगी। शर्मा के इस बयान के बाद जहां संस्था का अस्तिव खतरे में पड़ गया है और कई प्रदेशों के पदाधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं कोर कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों डॉ के.एन.पांडेय, जितेन्द्र बच्चन और राजीव कुमार ने मुकुल शर्मा से बात कर एक बार फिर से उन्हें अपने निर्णण पर विचार करने का अनुरोध किया। इसके बावजूद शर्मा ने इस्तीफा वापस नहीं लिया है।


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