नागपुर में ऑक्सीजन बचाने के लिए पुलिस का पहरा

बिपेन्द्र कुमार सिंह/राष्ट्रीय जनमोर्चा
नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में कोरोना की स्थिति काफी भयावह है। यहां के सरकारी अस्पताल हों या निजी, सभी जगह ऑक्सीजन की किल्लत है। पहले बेड के लिए फिर रेमडेसिवीर इंजेक्शन और अब ऑक्सीजन की कालाबाज़ारी चरम पर पहुंच चुकी है। ऑक्सीजन की कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रशासन ने ऑक्सीजन रिफिलिंग प्लांट पर पुलिस की तैनाती कर दी है। साथ ही यह आदेश जारी किया है कि सिर्फ हॉस्पिटल को ही ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए।
ऑक्सीजन की किल्लत को देखते हुए नागपुर के बाहर की चार कंपनियां नागपुर जिला प्रशासन को ऑक्सीजन आपूर्ति करने के लिए राजी हो गई हैं।विदर्भ के वर्धा, भंडारा की कुछ कंपनियां हैं तो छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट भी नागपुर को ऑक्सीजन देने के लिए तैयार है। इसके साथ ही नागपुर में निजी अस्पतालों को प्रशासन के दिशा-निर्देश के अनुसार ही ऑक्सीजन मुहैया कराया जा रहा है, वहां कालाबाजारी न हो, कहीं और का सिलेंडर कहीं और न चला जाए, इसके लिए खाकी वर्दी के साथ-साथ सादे कपड़ों में भी पुलिस सक्रिय है।
सूत्रों के अनुसार नागपुर में प्रतिदिन 100 से 105 मेट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। वर्तमान में रोजाना 6000 से 7000 नए संक्रमित मिल रहे हैं, इस वजह से ऑक्सीजन की मारामारी मची हुई है। नागपुर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में सर्वाधिक कोरोना के संक्रमित मरीज भर्ती हैं। मेडिकल कॉलेज में रोजाना सामान्य दिनों में 500 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है, लेकिन कोरोना काल के दौरान 12,000 से 13,000 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। सितंबर में नागपुर में ऑक्सीजन की डिमांड 60 मेट्रिक टन पर पहुंची थी, नवंबर महीने में संक्रमित की संख्या घटने के साथ ही डिमांड घटकर 30 से 35 मेट्रिक टन पर आ गई थी, लिकन मार्च में फिर से संक्रमितओं की संख्या बेतहाशा वृद्धि हुई तो ऑक्सीजन की समस्या पैदा हो गई है।

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