राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
रांची। भूत-प्रेत के अंधविश्वास से जुड़ी दिल दहलाने वाली घटना। झारखंड के आदिवासी इलाके में फिर हुई हत्या। डायन के नाम पर गुमला जिले में एक मासूम सहित पांच लोगों की हत्या कर दी गई। दिल दहला देने वाली वारदात हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
दरअसल, अदिवासी बहुल गुमला जिला के गांवों में सबसे ज्यादा अंधविश्वास है। यहां जादू टोना, भूत-पिशाच और डायन-बिसाही के नाम पर अक्सर नरसंहार की घटनाएं होती रहती है। अभी लोग पुरानी घटनाओं को भूल भी नहीं पाए थे कि अब एक बार फिर कामडारा के पहाड़गांव आमटोली में अंधविश्वासी लोगों ने एक ही परिवार के 5 लोगों की निर्मम हत्या कर दी। यह आदिवासी इलाका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां कई दिनों से गांव में कुछ पशु मर रहे थे। ऐसे में एक पुजारी ने बताया कि कुछ लोग डायन के वश में हैं। ऐसे में जिन पांच लोगों को डायन के वश में बताया गया, उनकी हत्या कर दी गई। उनमें पांच साल का एक बच्चा भी शामिल है।
23 फरवरी को ग्रामसभा की एक बैठक हुई थी और गांव के पुजारी मथुरा टोपनो ने कुछ नाम बताए थे। इसकी अगली सुबह यानि 24 फरवरी को एक बुजुर्ग व्यक्ति ने जोसफिना टोपनो नाम की 55 वर्षीय महिला का शव उसके ही कच्चे घर के बाहर देखा। अंदर जाने पर उसके पति निकोदिम का शव मिला। इसके अलावा बगल के कमरे में तीन और शव मिले। ये शव निकोदिम के बेटे विन्सेंट, बहू सिलवंती और उनके 5 साल के पोते अलबिन के थे। मासूम बच्चे के पास में ही उसका ट्रक वाला खिलौना पड़ा था।
कहा जा रहा है कि पुजारी मथुरा की ओर से नाम बताए जाने के करीब 10 या 12 घंटे बाद इन लोगों की कुल्हाड़ी से वार कर हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। लेकिन गांव में अंधविश्वास कम नहीं हो रहा है। इस घटना के बाद भी कई लोगों ने कहा कि उनके गांव में काले जादू का साया है या फिर उनकी देवी या देवता नाराज हो गए हैं। दरअसल, झारखंड के आदिवासी इलाकों से अक्सर ऐसी खबरें आती हैं। अंधविश्वास के चलते 5 लोगों की इस निर्मम हत्या के मामले को लेकर गांव के लोगों ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। हालांकि कई लोगों ने यह जरूर कहा कि उनके गांव में किसी ‘बुरी शक्ति’ का असर हुआ है।
गांव की बात करें तो एक हाई स्कूल है, पंचायत भवन है और 5 मिशनरी स्कूल हैं। लेकिन गांव में एक ही परिवार ऐसा है, जिसने 10वीं से ज्यादा की पढ़ाई की है। अशिक्षा का ही नतीजा है कि अंधविश्वास में हत्याओं के अलावा महिलाओं को घुमाने, सिर मुड़वाने, गांव से बाहर निकालने, जुर्माना वसूलने सहित कई घटनाएं अब तक घट चुकी हैं। सबसे दुखद बात यह है कि समाज के सामने अंधविश्वास का नंगा नाच होता है और इसमें कई पढ़े-लिखे लोग मूक-दर्शक बने रहते हैं। राष्ट्रीय जनमोर्चा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछता है कि आखिर यह घिनौना अपराध कब बंद होगा? कब लोग खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे?


Leave a Reply