राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
नई दिल्ली/गाजियाबाद। नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन के 17वें दिन शनिवार को किसानों ने दिल्ली और गाजियाबाद के सभी टोल नाकाओं को दो घण्टे तक फ्री कर दिया। इस बीच जो भी वाहन आए, उन्हें बिना टोल दिए निकाला गया। इस बीच पूर्व घोषित कार्यक्रम के मुताबिक एनएच-9 पर यूपी गेट पर दिल्ली जाने वाली लाइन में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। वहीं किसानों और विपक्ष के विरोध का सामना कर रही बीजेपी ने देश के अलग-अलग शहरों में 700 चौपाल का आयोजन करने का फैसला लिया है।
शनिवार को आंदोलनकारी किसान सुबह से ही पिलखुआ और दुहाई टोल प्लाजा पर जमे हुए थे। किसानों की घोषणा को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी पुरी तरह मुस्तैद थे। दोनों टोल पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए थे। इसके बावजूद किसानों ने तय कार्यक्रम के अनुसार दोनों टोल को पूरी तरह फ्री कर दिया। जबकि मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे और उन्होंने किसानों को समझाने का प्रयास भी किया, लेकिन किसानों ने उनकी बात मानने से इनकार करते हुए टोल फ्री कर दिया। सुबह हुई हल्की बुंदाबांदी भी किसानों को विचलित नहीं कर सकी। वे लगातार एनएच-9 पर डटे रहे।
दूसरी तरफ यूपी गेट पर फ्लाईओवर के नीचे कृषि कानून रद्द करवाने की मांग पर अड़े किसानों ने आज आंदोलन तेज कर दिया। ऐलान के मुताबिक दिल्ली को जोडऩे वाली सभी सडक़ों पर किसानों ने ज्यादातर टोल प्लाजा फ्री कर दिए। प्रदर्शनकारी किसानों ने गोला-लाठी लगाते हुए केन्द्र की सरकार को चेतावनी दिया है कि यदि बिल कृषि कानूनों को खारिज नहीं किया जाता है तो सरकार भी गोला-लाठी से बंधने को तैयार रहे। भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि गोला-लाठी एक ऐसी युद्ध कला है जो प्रतिद्वंद्वी को बिना चोट पहुंचाए एक जगह गठरी की तरह बांधकर डाल दिया जाता है। टिकैत ने एक किसान के माध्यम से यह प्रदर्शन दिखाया भी। उसके हाथ बांधकर एक लाठी पैरों के बीच फंसा दी गई, जिससे किसान हिलडुल नहीं पाया। किसान नेता टिकैत ने भाजपा के द्वारा चौपाल लगाने के सवाल पर कहा कि भाजपा सरकार को कानून लाने से पहले 700 चौपाल लगानी चाहिए थी लेकिन 700 से भी क्या होगा? देश तो बहुत बड़ा है, 7 हजार चौपाल लगानी चाहिए। क्योंकि कृषि कानून गांव में बनने चाहिए, कोठियों में नहीं।


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