कोरोना वायरस (कोविड-19)। दुनिया में जिस तेजी से यह महामारी बढ़ रही है, उसे देख-सुनकर रूह कांप जाती है। मंगलवार को हमने अपने जीवन में पहली बार किसी प्रधानमंत्री को जनहित के लिए इतना भावुक होते देखा। उन्होंने अपने लिए नहीं, देश के लिए, आपके लिए और आपके परिवार को बचाने के लिए पहले एक दिन का जनता कफ्र्यू लगाया। उसके बाद हाथ जोडक़र निवेदन किया– इस महामारी का कोई तोड़ नहीं है। बचाव है तो सिर्फ और सिर्फ आप सामाजिक दूरी बनाकर रखिए। तीन सप्ताह तक घर में रहिए, अपने घर में रहिए और घर में रहिए। 21 दिन का लॉकडाउन!
अब हमारा फर्ज बनता है कि हम सरकार का पूरा साथ दें। धर्म भी यही कहता है कि जब राष्ट्र पर संकट मंडरा रहा हो तो हम हर मुकाबले के लिए तैयार रहें। सरकार के फायदे के लिए नहीं, बल्कि अपने और अपने परिवार के लिए। दोस्तों के लिए। नाते-रिश्तेदारों के लिए। सगे-संबन्धियों के लिए। समाज के लिए। देश के लिए। आप यह मानकर चलिए कि आप घर के अंदर रहकर एक महायुद्ध लड़ रहे हैं। कोरोना वायरस से बचाव के लिए उससे जंग कर रहे डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मचारियों, पुलिस और मीडियाकर्मियों की सहायता कर रहे हैं। उनका काम आसान बना रहे हैं। हम आप ही नहीं, आज पूरी दुनिया इस महामारी से पस्त है। बड़े-बड़े देश जो एक मिनट में संसार को नेस्तनाबूत करने का दम भरते हैं, उनके यहां भी लाशों पर लाशें बिछती जा रही हैं। कोविड-19 से बचने का उनके पास कोई उपाय नहीं है। गोले-बारूद, तीर-तलवार सब बेकार।
और उस महामारी से बचने के लिए हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हम सभी को घर में सुरक्षित रहने को कहा है। सोचिए, जब हम इस जंग को फतह कर लेंगे तो कितनी खुशी होगी हमें और हमारे बच्चों को। हमने सीधे यमराज को चुनौती दी थी। मौत को भगा दिया। वो भी घर के अंदर रहकर। इतिहास रच उठेगा। आने वाली तमाम पीढिय़ां हमारी चर्चा महज इस बात के लिए करेंगी कि हम भारतवंशियों ने घर में रहकर महामारी को मात दे दी। उस महामारी को, जिसके आगे अमेरिका और चीन जैसे देश नहीं टिक पाए। भारत ने उस पर विजय पा ली।
1.3 अरब लोगों की जनसंख्या वाले देश भारत में बुधवार से संपूर्ण लॉकडाउन अमल में आ गया। टे्रनों, बसों और हवाई उड़ानों पर रोक लगा दी गई। कोरोना वायरस को रोकने के लिए यह किसी भी देश की सरकार की तरफ से उठाया गया सबसे बड़ा फैसला है। इस बीच देश में कोराना वायरस पॉजिटिव की संख्या 606 हो चुकी है। इनमें से 11 लोगों की मौत हो चुकी है और 42 लोग ठीक होकर अस्पताल से घर लौट आए हैं। हर दिन ये आंकड़े बढ़ रहे हैं। आज ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। बुधवार की इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। केन्द्र सरकार ने लोगों को कई सहूलियतें देने का ऐलान किया है। खासकर गरीबों की देखभाल के लिए राज्य सरकारें भी कमर कस चुकी हैं। शासन-प्रशासन मुस्तैद है।
जीवन में परेशानियां आती रहती हैं। जीवन ही संघर्ष है। जिस जिंदगी में जंग न हो, उसकी कोई कहानी नहीं होती। हमें आप पर सदैव गर्व रहेगा। अपने बच्चों पर गर्व रहेगा। माता-बहनों और बुजुर्गों पर गर्व रहेगा। आप जैसे दोस्तों पर फक्र होगा कि आपने अपना साथ दिया। प्रधानमंत्री का साथ दिया और इस देश का साथ दिया। आने वाले कुछ दिन और कठिन हो सकते हैं। गरीबों और मजदूरों की परेशानी थोड़ी और बढ़ सकती है। मजलूमों और लाचारों की दिनचर्या बिगड़ सकती है। हमें उनका भी ख्याल रखना है। सरकार ने किसी आवश्यक वस्तु पर पांबदी नहीं लगाई है। मुनाफाखोरों पर प्रशासन पूरी तरह सख्त है। मीडिया की नजरें जर्रे-जर्रे पर हैं। कहीं कोई परेशानी पेश आए तो तुरंत पुलिस और प्रशानिक अधिकारियों को बताइए। हेल्प नंबरों पर संपर्क करिए। पीछे मत हटिए। याद रखिए, आज चूक गए तो शायद पछताने का मौका भी न मिले। उस महाविनाश से टकराने की शपथ लीजिए। नव संवत्सर के प्रथम दिन संकल्प कीजिए- हम इस लड़ाई को जरूर जीतेंगे। घर में रहेंगे। सरकार के आदेश के बिना बाहर नहीं निकलेंगे। हमें कोरोना को हराना है! ������Wh


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