अलीगढ़: लॉकडाउन का दंश, बिना भोजन के 5 बच्चे और मां सूखकर कांटा

अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के इस जिले में कोरोना महामारी के लॉकडाउन के चलते हैरान कर देने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक परिवार दो माह से भूखा रहा। खाने को सभी तरस गए। उन्हें भोजन नहीं मिला। कुल 5 बच्चे और उनकी मां की हालत चिंतानजक हो गई, तब पता चला और अब मलखान सिंह जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जिला अस्पताल के इंचार्ज डॉक्टर अमित के अनुसार 40 वर्षीय महिला और उसके पांच बच्चों को वार्ड नंबर 8 में भर्ती कराया गया है। इन सभी ने 10 दिन से कुछ नहीं खाया, जिसकी वजह से उनकी तबीयत बहुत खराब है। इनका इलाज किया जा रहा है। तीन बच्चों की हालत ज्यादा गंभीर बनी हुई है लेकिन जल्द ही उन्हें रिकवर कर लिया जाएगा।
दरअसल, महिला की सबसे बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है। उसको जब मायके की हालत के बारे में पता चला तो पति के साथ घर आई। तब पता चला कि छह सदस्यों के इस परिवार को किसी ने कुछ रोटियां दे दीं तो ये लोग वही खाकर और पानी पीकर गुजारा करते रहे। लेकिन पिछले 10 दिन से अन्न का एक दाना तक नहीं नसीब हुआ। भूखे रहने से पूरे परिवार की तबीयत खराब हो गई। महिला के पति विनोद की पिछले लॉकडाउन से पहले मौत हो गई थी। उसके बाद से पूरा परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया। परिवार में चार लड़के और एक लड़की है। लड़की की उम्र 13 वर्ष है। बड़ा बेटा 20, दूसरा 15, तीसरा 10 और सबसे छोटा बेटा 5 साल का है।
विनोद की मौत के बाद पूरा परिवार पेट पालने के लिए एक फैक्टरी में चार हजार रुपये की नौकरी शुरू कर दी। बाद में लॉकडाउन के कारण फैक्टरी भी बंद हो गई। दूसरी जगह काम ढूंढा पर कहीं नहीं मिला। धीरे-धीरे घर का सारा राशन खत्म होने लगा। नौबत यह हो गई कि लोगों के रहमोकरम पर यह परिवार जिंदा रहने लगा। लॉकडाउन खुलने के बाद बड़े बेटे ने मजदूरी शुरू की। जिस दिन काम मिल जाता, उस रोज राशन पानी आ जाता, लेकिन जब काम नहीं मिलता तो भूखे रहना पड़ता। खाने-पीने की कमी के चलते पूरा परिवार दिन पर दिन कमजोर होता गया। धीरे-धीरे सभी सदस्य बीमारी की चपेट में आते चले गए।
कोरोना की दूसरी लहर ने तो जीना भी मुश्किल कर दिया। लॉकडाउन होते ही बड़े बेटे को काम मिलना बंद हो गया। पिछले करीब दो माह से उन्हें भरपेट खाना नहीं मिला। परिवार ने घर से निकलना बंद कर दिया। आस पड़ोस के लोग जो भी खाने के लिए दे देते बस उसी से काम चल जाता, नहीं तो पानी पीकर सो जाते। बड़ी बेटी-दामाद को पता चला तो वे लोग परिजनों को अस्पताल ले गए, जहां एक एनजीओ के माध्यम से इन लोगों की मदद की जा रही है।

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