राष्ट्रीय जनमोर्चा ब्यूरो
गाजियाबाद। जीडीए (गाजियाबाद विकास प्राधिकरण) ने साइकिल ट्रैक के सौंदर्यीकरण के नाम पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए। लेकिन जिस स्थान पर सौंदर्यीकरण दिखाया गया है, वहां कुछ भी नहीं किया गया है। पूरा ट्रैक गंदगी से बेतरतीब पड़ा है। प्रथम दृश्टया यह सारा पैसा अधिकारी और कर्मचारी मिलीभगत कर डकार गए। और अब जब मामले का खुलासा हो रहा है तो जांच करने के नाम पर जीडीए, नगर निगम और आवास विकास के अधिकारी एक-दूसरे को जिम्मेदार बताकर अपना-अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
पूरा मामला कुछ इस तरह है- गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा साइट-4 साहिबाबाद की वसुंधरा योजना से वाया झंडापुर महाराजपुर चैक पोस्ट को जाने वाली रोड के साथ साइकिल ट्रैक के समानांतर उद्यानिक सौंदर्यीकरण के नाम पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। लेकिन हकीकत में वहां कुछ किया ही नहीं गया। राष्ट्रीय जनमोर्चा के पास इसके दस्तावेज मौजूद हैं। इस मामले की प्राधिकरण में शिकायत की गई तो जीडीए ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह प्रकरण आवास विकास परिषद से सम्बंधित है। जबकि स्थल पर लगा विकास प्राधिकरण डिस्प्ले बोर्ड इस बात की गवाही दे रहा है कि यह स्थल जीडीए के अधीन है।
आवास विकास परिषद के अधिकारियों से मामले की शिकायत की गई तो उन्होंने इसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम पर डाल दी। नगर निगम के अधिकारी ने अवगत कराया है कि संबंधित स्थल का उद्यानिक सौंदर्यीकरण हेतु योजना स्वीकृति के लिए भेजी गई है। प्रस्ताव मंजूर होते ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे स्पष्ट होता है कि अभी तक उक्त स्थल पर कोई सौंदर्यीकरण नहीं किया गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जीडीए ने सौंदर्यीकरण के नाम पर जो करीब 01 करोड़ रुपये खर्च किए, वह कहां गया? अगर जीडीए का यह कार्य नहीं है तो उस स्थल पर उसने अपना बोर्ड क्यों लगाया है? आखिर कौन है इसका जिम्मेदार और कब होगी पूरी जांच? दोषियों पर कार्रवाई होगी भी या नहीं?


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