राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
लखनऊ। उत्तंर प्रदेश में कोरोना ने कहर मचा रखा है। लगातार बढ़ते मामलों और सही समय पर इलाज न मिलने के कारण राजधानी लखनऊ में हाहाकार मचा है। अस्प तालों में बेड नहीं बचे हैं, ऑक्सींजन सिलेंडर की कमी है। ऐसे में कई मरीजों को इलाज के अभाव में जान गंवानी पड़ रही है। लखनऊ में ऑक्सीीजन गैस एजेंसी के बाहर लोगों की लाइन देखी गई। परिजन एक-एक सांस खरीदने के लिए दोगुना पैसा देने को तैयार हैं, तब भी उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।
उल्लेखनीय है कि लखनऊ में छह कंपनियां ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रही हैं। रोजाना 5040 ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति हो पा रही है, जबकि इस समय खपत साढ़े छह हजार से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर की है। इसके चलते आसपास के जिलों से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाने पड़ रहे हैं। सामान्य दिनों में करीब डेढ़ हजार सिलेंडरों की खपत होती थी। केजीएमयू, राम मनोहर लोहिया और पीजीआई के कोविड हॉस्पिटल में 20 हजार किलोलीटर क्षमता का लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट है। मुरारी गैसस प्राइवेट लिमिटेड के डिवीजनल सेल्स मैनेजर ने बताया कि ऑक्सीजन की मांग चार गुना बढ़ गई है। ऑक्सीेजन की आपूर्ति प्रमुख कोविड अस्पतालों में जाती है, और निजी उपयोग के लिए इसकी आवश्यकता वाले लोगों को की जा रही है। वहीं उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल का कहना है कि प्रदेश में ऑक्सीजन की सप्लाई नियमित है। उन्होंने यह भी बताया कि 15 दिन के अंदर 10 नए प्लांट बनाएंगे। इन प्लांटों में हवा से ऑक्सीजन तैयार की जाएगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी आदेश दिया है कि एक हफ्ते के अंदर ये सारे प्लांट शुरू कर दिए जाएं।


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