प्रयागराज: कायस्थ समाज ने कहा- टिकट नहीं तो वोट नहीं!

प्रयागराज में संपन्न हुई कायस्थ समाज की बैठक

दीपक श्रीवास्तव
प्रयागराज (राष्ट्रीय जनमोर्चा)। यहां के कायस्थ समाज ने आज रविवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उसने ऐलान किया है कि अगर आगामी विधानसभा के चुनाव में कायस्थ समाज की उपेक्षा की गई और उसके प्रतिनिधि को उम्मीदवार नहीं बनाया गया तो वे वोट भी नहीं देंगे।
दरअसल, 31 जनवरी को अल्लापुर के आर्गस एकेडमी में कायस्थ बुद्धीजिवियों की एक बैठक की गई। कायस्थ समाज के वक्ताओं ने चिंतन-मनन के बाद कायस्थ समाज को राजनीतिक रूप से सशक्त करने के लिए कारगर उपाय खोजने का प्रयास किया। बैठक को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रवीण श्रीवास्तव उर्फ धुन्नू भैया ने कहा कि आज़ जरूरत है कि हम अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर अपने स्वाभिमान की रक्षा करते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों को अपनी संख्या बल से परिचित कराएं। बहुत उपेक्षा हो चुकी है। अब और बर्दाश्त नहीं करेगा कायस्थ समाज और न ही वोटों को ज़ाया होने देगा।
अजय श्रीवास्तव “रामू दादा” ने सभी कायस्थों को संगठित होकर अपनी संख्या बल के आधार पर विभिन्न राजनीतिक दलों के सम्मुख दबाव बनाने हेतु कारगर नीति बनाने की अपील की। जबकि बैठक में मौजूद धीरेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि टिकट नहीं तो वोट नहीं, टिकट हो तो वोट हो। अन्य वक्ताओं के वक्तव्यों में भी राजनीतिक दलों के प्रति तल्खी देखने को मिली।
बैठक में कल्पना श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव, रतन खरे, प्रशांत श्रीवास्तव, मलय श्रीवास्तव, अलोक श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, सौर्यदीप श्रीवास्तव एवं पवन शंकर, महेंद्र खरे, सचिन श्रीवास्तव, योगेन्द्र श्रीवास्तव आदि शामिल रहे और इन सभी ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए। बैठक की अध्यक्षता हरीशचंद्र श्रीवास्तव ने की और संचालन प्रशांत श्रीवास्तव ने किया। एबीकेएम के डॉ मनीष श्रीवास्तव ने सभी आए हुए गणमान्य के प्रति आभार जताया है।

2 Comments

  1. कायस्थों को अगड़ी-पिछड़ी और दलितों में मौजूद तमाम तुलनात्मक रूप से कम संख्या बल वाली जातियों को गोलबंद कर राजनीति करना होगा तभी कुछ हो सकता है, अभी बिहार और उत्तर प्रदेश में अगड़ी-पिछड़ी और दलितों के भीतर थोड़ा ज्यादा संख्या बल वाली 9-10 जातियों के लोग हीं राजनैतिक पदों पर काबिज हैं, इन जातियों के घृणित राजनीति को समझना होगा और उसके काट के लिये काम करना होगा, धन्यवाद!

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