राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
देहरादून। श्रुति फाउंडेशन के तत्वावधान में रविवार को ओएनजीसी ऑफिसर्स क्लब, देहरादून में भारतीय शास्त्रीय संगीत को समर्पित ‘साधना’कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। ‘बैठक सीरीज’के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ युवा प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष श्रीमती मधु भट्ट रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संगीत आत्मा और परमात्मा के मध्य संवाद स्थापित करने का माध्यम है तथा सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे पहले संगीतमय संध्या की शुरुआत ‘साधना शिविर’के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत तबला युगल से हुई। तत्पश्चात विद्यार्थियों द्वारा हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की समूह प्रस्तुति तथा तबला समूह वादन प्रस्तुत किया गया।
संध्या के अगले चरण में दिल्ली-एनसीआर स्थित संगीत समूह ‘सर्वत्र’ने अपनी विशेष प्रस्तुति ‘कहत कबीर’के माध्यम से संत कबीर की वाणी को सुरों में पिरोकर प्रस्तुत किया। गुरु पं. मिथिलेश कुमार झा के मार्गदर्शन में हिमांशु मिश्रा के नेतृत्व वाली टीम ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विशेष प्रस्तुति रही, जिसमें सुप्रसिद्ध गायक डॉ. अविनाश कुमार ने अपनी स्वर-साधना से श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराइयों से परिचित कराया। उनके साथ तबले पर अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार पं. मिथिलेश कुमार झा तथा हरमोनियम पर उस्ताद जाकिर धोलपुरी ने संगत की। तीनों कलाकारों के सुर, लय और संवाद ने कार्यक्रम को एक अविस्मरणीय ऊँचाई प्रदान की तथा उपस्थित संगीत प्रेमियों को देर तक बांधे रखा।
श्रुति फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि ‘साधना शिविर’का यह 9वाँ संस्करण विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा।
कार्यक्रम का संचालन पिकाशा पाण्डेय ने किया। पं. मिथिलेश झा ने सभी कलाकारों, अतिथियों, श्रोताओं एवं सहयोगियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी उपस्थित रहे तथा संपूर्ण वातावरण भारतीय शास्त्रीय संगीत के सुरों से गुंजायमान रहा।


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