राष्ट्रीय जनमोर्चा संवाददाता
नई दिल्ली। समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया ने छत्रपति शिवाजी महाराज की 391वीं जयंती मनाई। इस अवसर पर 19 फरवरी 1630 में जन्मे वीर शिवाजी महाराज की गौरव गाथा का वर्णन किया गया। शिवाजी महाराज के पिता का नाम शाहजी भोसले और मां का नाम जीजाबाई था। शिवाजी महाराज बचपन से बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उनमें सीखने-समझने की इच्छा बेहद प्रबल थी औरउनके पिता उन्हें अस्त्र-शस्त्र चलाना भी सिखाते थे।
शिक्षा और सामाजिक उत्थान के लिए संपूर्ण भारत में कार्य कर रही संस्था समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन ने शिवाजी की जीवनी के कुछ प्रेरणादायक प्रमुख अंश बताते हुए कहा कि विश्व में गुरिल्ला युद्ध शिवाजी की देन है। साल 1670 में मुगलों की सेना के साथ उन्होंने जमकर लोहा लिया था। मुगलों को हराकर सिंहगढ़ के किले पर अपना परचम लहराया था। इसके बाद 1674 में उन्होंने ही पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी थी। भारतीय इतिहास में कई योद्धाओं ने अपनी अहम भूमिका निभाई है। कई वीर योद्धाओं ने अपने प्राणों की आहुति दी है, उन्हीं में से एक थे छत्रपति शिवाजी महाराज।
बच्चन ने कहा कि हमें भी वीर शिवाजी से प्रेरणा लेते हुए समय, काल और परिस्थिति के अनुसार अपने तौर-तरीके बदलने होंगे। शिवाजी ने यही सीख दी है। शिवाजी के पास जांबाज सेनापति थे, जो बहुत विश्वासी थे। इसी वजह से शिवाजी ने हर मोर्चे पर दुश्मनों का डटकर मुकाबला किया। आपको भी सफलता हासिल करनी है तो अपनी सोच बदलो, जागरूक बनो और जनहित के लिए लगातार संघर्ष करते रहिए।
राष्ट्रीय कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में देशभक्ति के गीत, शिवाजी पर सम्भाषण, कविताएं आदि प्रस्तुत की गईं। भाग लेने वालों में शिवशंकर तिवारी, अरुण कुकरेती, शारदा सिंह, नवीन राय, राजीव दत्ता, श्रीमती ममता सिन्हा आदि शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन सुधीर चौधरी ने किया।


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